शाम 4 बजे रीपो रेट कटौती का सरप्राइज देने वाला है रिज़र्व बैंक?

मुंबई
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बेंचमार्क रीपो रेट में पहले लगाई गई उम्मीद से पहले कटौती कर सकता है। आज शाम 4 बजे आरबीआई गवर्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। संभावना जताई जा रही है कि केंद्रीय बैंक अमेरिकी फेड रिज़र्व की राह चल सकता है और अचानक रीपो रेट में कटौती का ऐलान कर सकता है।



रविवार को फेडरल रिजर्व ने इंट्रेस्ट रेट घटाकर जीरो पर्सेंट कर दिया। अमेरिका में इंट्रेस्ट रेट घटकर 0-0.25 पर्सेंट की रेंज में आ गया है। मार्च के पहले सप्ताह में भी फेडरल रिजर्व ने इंट्रेस्ट रेट में 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का ऐलान किया था। इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलियास न्यू जीलैंड, यूरोपियन यूनियन भी इसी राह पर हैं। बैंक ऑफ जापान ने भी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड(ETF) की खरीदारी डबल कर दी और कॉरपोरेट बॉन्ड और कमर्शल पेपर खरीदने की रफ्तार बढ़ा दी है।


फॉरेक्स मार्केट में लिक्विडिटी बनी रहे इसके लिए उसने पिछले हफ्ते दो अरब डॉलर का स्वॉप ऑक्शन कराया था। मामले के जानकार सूत्र ने कहा, 'टूर ऑपरेटर और होटल और रेस्ट्रॉन्ट चेन का बिजनस बेपटरी हो सकता है। अगर कस्टमर्स नहीं आते हैं तो उनके पेमेंट में दिक्कत हो सकती है।' RBI फेडरल रिजर्व के ग्लोबल स्वॉप लाइन फैसिलिटी का हिस्सा नहीं है लेकिन फाइनैंशल मार्केट में फ्रीज वाली स्थिति बनने से रोकने के लिए बाकी इमर्जिंग मार्केट्स के (अपने जैसे) सेंट्रल बैंक के साथ सहयोग जरूर कर सकता है।


PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के सीआईओ कुमारेश रामकृष्णन कहते हैं, 'फिलहाल डॉलर की लिक्विडिटी ज्यादा जरूरी है लेकिन फाइनैंशल इयर खत्म होने से पहले सिस्टम में रुपये की पर्याप्त उपलब्धता भी जरूरी है। रिवर्ज बैंक फिर से स्वॉप ऑक्शन करा सकता है लेकिन वह कोऑर्डिनेटेड ऐक्शन के लिए दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स पर करीबी नजर रख सकता है।' इस बीच बैंकर्स का कहना है कि आरबीआई के पास दूसरे देशों के सेंट्रल बैंक से ज्यादा वक्त है और रेट कट पर फैसला लेने के लिए अप्रैल के पहले हफ्ते में तय मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की मीटिंग को आगे नहीं बढ़ाएगा।


डीबीएस बैंक के कंट्री ट्रेजरर आशीष वैद्य कहते हैं, 'पिछले 15 दिनों में आम राय कटौती नहीं होने से बदलकर कटौती की संभावना तक आ गई है लेकिन मेरे हिसाब से आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी की पहले से तय तारीख का इंतजार कर सकता है क्योंकि भारत पर कोरोना वायरस का सीमित असर हुआ है।' रिजर्व बैंक ने फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए गुरुवार को 2 अरब डॉलर का 6 महीने के USD सेल/बाय स्वॉप का एलान किया था। RBI ने उसके बाद शुक्रवार को सात दिन के लिए 25,000 करोड़ रुपये का रेपो ऑक्शन और 3.80 लाख करोड़ रुपये का 14 दिन का रिवर्स रेपो ऑक्शन कराया था।


बैंकरों का कहना है कि रिजर्व बैंक की तरफ से सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने का कदम सही समय पर उठाया गया है और हालात उतने गंभीर नहीं हैं कि समय से पहले रेट कट कर दिया जाए। इंडसइंड बैंक के ट्रेजरर अरुण खुराना के मुताबिक, 'बैंकों का MCLR पहले से नीचे आ रहा है और सिस्टम से लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये की एक्सेस लिक्विडिटी है। इसलिए देश में जल्दबाजी दिखाने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि जब भी RBI रेट कट करेगा, उसे ज्यादा रेट कट करना होगा ताकि बाजार पर उसका गहरा असर हो।' RBI ने पिछली बार 4 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करके नौ साल के निचले लेवल 5.15% पर आ गया था। वह रीपो रेट में फरवरी 2019 के बाद से कुल 135 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है।